Bihar Board Class 12th Chemistry Most vvi Subjective Question 2027: कक्षा 12वीं रासायनशास्त्र का महत्वपूर्ण प्रश्न 2027

Bihar Board Class 12th Chemistry Most vvi Subjective Question 2027: कक्षा 12वीं रासायनशास्त्र का महत्वपूर्ण प्रश्न 2027Bihar Board Class 12th Chemistry Most vvi Subjective Question 2027: नमस्कार दोस्तों, अगर आप इंटर की परीक्षा बिहार बोर्ड से 2027 में परीक्षा देने वाले है और आपकी तैयारी अभी तक नहीं हुई है। तो हम आपके लिए रासायन शास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न लाए है, जिसे हर हाल में याद कर लें। यह प्रश्न परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

Bihar Board Class 12th Chemistry Most vvi Subjective Question 2027 – रट्ट लो सब 

प्रश्न 1.अंतराकाशी दोष (interstitial defect) किसे कहते है ?

उत्तर- जब किसी क्रिस्टल के अंतराकाशी स्थान पर कुछ अवयवी कण (परमाणु, अणु, आयन) आ जाते हैं तो इस प्रकार क्रिस्टल में जो दोष उत्पन्न होता है वह अंतराकाशी दोष कहलाता है।

प्रश्न 2.बिंदु दोष (point defect) किसे कहते है ?

उत्तर- इस दोष में अवयवी कण अपना जालक बिंदुओं को छोड़कर गायब हो जाता है या अपने आस्थान को छोड़ का अंतराकाशी संस्थानों में प्रवेश कर जाता है बिंदु दोष कहलाता है।

प्रश्न 3.अल्कोहल का जलीय विलियन विद्युत का कुचालक है क्यों ?

उत्तर- अल्कोहल जल के साथ हाइड्रोजन बंधन बनाता है जो ध्रुवीय होता है इस प्रकार अल्कोहल के जलीय विलयन विद्युत का कुचालक होता है।

प्रश्न 4. फराडे के विद्युत अपघटन के प्रथम नियम लिखें ?

उत्तर- जब किसी इलेक्ट्रोडलाइट मैं विद्युत धारा प्रवाहित किया जाता है तो पदार्थ की एकत्रित मात्रा इलेक्ट्रोलाइट पर प्रवाहित विद्युत धारा के समानुपाती होती है इस फ्राइडे का प्रथम नियम कहते हैं।

प्रश्न 5. संचायक बैटरी से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- जिस सेल में रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होता तथा उसके रासायनिक प्रतिक्रिया को हम वापस प्राप्त कर सकते हैं उसे सेकेंडरी सेल कहा जाता है जैसे लेड संचायक सेल

प्रश्न 6. प्राथमिक सेल से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- जिस सेल में रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है उसे प्रायमरी सेल कहते हैं यह सेल सभी रासायनिक प्रतिक्रिया के लिए अनुत्क्रमणीय होता है जैसे लेक़लांश सेल

प्रश्न 7. इलेक्ट्रोड और इलेक्ट्रोड विभव को परिभाषित करें?

उत्तर- इलेक्ट्रोड विद्युत संचालक के द्वारा विद्युत धारा को प्रवाहित करने के लिए धात्विक छड़ की जरूरत होती है जिसे इलेक्ट्रोड कहा जाता है जैसे गलवानिक सेल में या उपकरण है जिसमें नमक के बिलियन में एक धातु की छाल रखी जाती है इसे इलेक्ट्रोड या हाफ सेल कहते हैं

इलेक्ट्रोड विभव जब एक धातु की छड़ को अपने स्वयं के आइनो वाले घोल में डुबाया जाता है तो इलेक्ट्रोड और धातु के छाड़ के बीच विभावांतर उत्पन्न होता है विकसित विभावांतर को इलेक्ट्रोड विभव कहा जाता है इसे Ecell से सूचित किया जाता है

प्रश्न 8. लवण सेतु क्या है इसके क्या उपयोग है ?

उत्तर:- I)परिपथ पूरा करना

Ii)विद्युत उदासीनता बनाने का कार्य करता है

प्रश्न 9. प्रबल और दुर्बल विद्युत अपघटन क्या है एक-एक उदाहरण दें ?

उत्तर- प्रबल विद्युत अपघटन :- वे पदार्थ जो बिलियन में पूर्णता आयनिक हो जाते हैं प्रबल विद्युत अपघटन कहलाते हैं जैसे Nacl ,kcl kno3 इत्यादि

दुर्बल विद्युत अपघटन ;- वह पदार्थ जो बिलियन में पूर्णता आयनिक नहीं हो पाते हैं उसे दुर्बल विद्युत अपघटन करते है जैसे ch3cooh , Nh2OH इत्यादि

प्रश्न.10. विद्युत रासायनिक तुल्यांक की परिभाषा दें।

उत्तर- विद्युत रासायनिक तुल्यांक किसी पदार्थ का वह भार होता है जो जमा होता है 1 एम्पियर विद्युत धारा 1 सेकंड तक (अर्थात् 1 कूलॉम) प्रवाहित करने से।

प्रश्न 11. रासायनिक बलगतिकी (chemical kinetics) किसे कहते है ?

उत्तर- रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत रासायनिक अभिक्रियाओं की दर, अभिक्रियाओं की क्रियाविधि एवं अभिक्रियाओं को प्रभावित करने वाले कारक आदि का अध्ययन किया जाता है उसे रासायनिक बलगतिकी कहते हैं।

प्रश्न 12. अभिक्रिया का वेग (दर) किसे कहते है ?

उत्तर- इकाई समय में अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में होने वाले परिवर्तन की दर को रसायनिक अभिक्रिया की दर या अभिक्रिया का वेग कहते हैं।

प्रश्न 13. कोलाइड बनाने की दो विधियों को लिखें।

उत्तर- रासायनिक विधि- कोलाइडल विलयन रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा तैयार किए जा सकते हैं जिससे अणु दोहरे अपघटन, ऑक्सीकरण, अपचयन या हाइड्रोलिसिस द्वारा बनते हैं, फिर ये अणु एकत्रित होकर विलयन का निर्माण करते हैं।

AS2O3+3H2S द्विक अपघटन

ऑक्सीकरण SO2+ 2H2S

AS2S3 (विलयन्) + 3H2O

3S (विलयन) + 2H2O

भौतिक विधि – इस विधि में वाडे के कणों को कोलॉइडल पुष्प गुच्छा में परिवर्तित कर दिया जाता है |

प्रश्न 14. स्कंदन (पेष्टीकरण)’ पद को परिभाषित करें।

उत्तर- पेष्टीकरण को इलेक्ट्रोलाइट की थोड़ी मात्रा की उपस्थिति में प्रकीर्णन माध्यम • से हिलाकर एक अवक्षेप को कोलॉइडल विलयन में परिवर्तित करने की प्रक्रिया के रूप में • परिभाषित किया जा सकता है। इस उद्देश्य के लिए प्रयुक्त इलेक्ट्रोलाइट को पेष्टाइजिंग एजेंट कहा जाता है। इस विधि का प्रयोग सामान्यतः ताजे बने अवक्षेप को कोलॉइडल विलयन में बदलने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 15. टिन्डल प्रभाव क्या है? व्याख्या करें।

उत्तर – टिण्डल प्रभाव- जब प्रकाश पुंज कोलॉइडल विलयन में प्रवाहित किया जाता है। तो प्रकाशपुंज का मार्ग प्रकाशित हो जाता है यह घटना विलयन में मौजूद कोलॉइडल कण द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन हो जाता है। यह फैराडे द्वारा देखी गई तथा बाद में टिंडल द्वारा व्यक्त की गई। इस प्रभाव को टिंडल प्रभाव कहा जाता है। प्रकाश को प्रकीर्णित करने के लिए कोलायडल कण की यह प्रवृत्ति आम तौर पर होती है।

प्रकीर्णन द्वारा दिखाई देने वाली किरण के पथ को टिंडल कोण कहते हैं। वास्तविक विलयन में प्रकाश के बिखड़ने के पर्याप्त व्यास के कण नहीं होते हैं और इसके कारण किरण अदृश्य हो जाती है। प्रकाश प्रकीर्णन आमतौर पर तब होता है जब प्रकाश अंत में विभाजित कण वाले एक विषमांगी तंत्र से टकराता है।

प्रश्न 16. भौतिक अधिशोषण और रासायनिक अधिशोषण के मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर- जब अधिशोषित अंतरआण्विक आकर्षण बल द्वारा धारण किया जाता है, अक्सर वैन डेर वाल्स बल कहा जाता है, तो अधिशोषण की भौतिक अधिशोषण या वैन डेर वाल्स अधिशोषण कहते हैं। हालांकि अधिशोष्य वाले अणु या परमाणु जब रासायनिक बंधनो द्वारा ठोस सतह पर होते हैं, तो रसोवशोषण या रासायन शोषण कहा जाता है।

भौतिक शोषण सामान्यतः उत्क्रमणीय होता है। जो निम्न ताप पर होता है और सक्रियण ऊर्जा के अभाव में होता है लेकिन रसायन शोषण आमतौर पर अनुत्क्रमणीय होता है यह उच्च ताप पर होता है और सक्रियण ऊर्जा की उपस्थिति में होता है।

प्रश्न 17. हैबर पद्धति द्वारा अमोनिया बनाने का सिद्धांत क्या है? अमोनिया से नाइट्रिक अम्ल कैसे बनाया जाता है? समीकरण दें।

उत्तर- हैबर पद्धति-अमोनिया का उत्पादन हैबर पद्धति द्वारा किया जाता है।

N2+3H2 Fe+Mo/450° 100-100atm 2NH3

नाइट्रिक अम्ल का उत्पादन- प्रथम पद अमोनियम का ऑक्सीकरण

4NH3 + 502 4NO + 6H2O

द्वितीय पद NO का ऑक्सीकरण

NO + O2 → NO2

तृतीय पद – NO2 को जल प्रवाहित कर

नाइट्रिक अम्ल का उत्पादन किया जाता है।

3NO2+ H2O→ 2HNO3 + NO

प्रश्न 18. सल्फेट आयन की जाँच आप कैसे करेंगे ?

उत्तर- नमक के घोल में BaCl2 का घोल डालने पर HCI की उपस्थिति में सल्फेट अघुलनशील अवक्षेप BaSO4 का प्राप्त होता है जो SO आयन की उपस्थिति को इंगित करते हैं।

BaCl2 + Na2SO4 → 2NaCl + BaSO4

प्रश्न 19. ऐल्कोहॉल एवं फीनॉल में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर- ऐल्कोहॉल एलीफैटिक यौगिक है

जबकि फीनॉल एरोमैटिक यौगिक है। ऐल्कोहॉल C-11 तक द्रव होता है जबकि फीनॉल उजला रंग का ठोस है। ऐल्कोहॉल को हम शराब एवं दवा के रूप में इस्तेमाल करते हैं लेकिन फीनॉल का इस्तेमाल कीटनाशक एवं विसंक्रमांकी के रूप में होता है। रेयानाशक के रूप में होता है।

प्रश्न 20. ऐल्कोहॉल के जलीय विलयन विद्युत का कुचालक क्यों होता है ?

उत्तर- विद्युत के सुचालक के लिए घुमने वाले आयन की उपस्थिति अनिवार्य होती है लेकिनऐल्कोहॉल के जलीय विलयन में घुमने वाले आयन अनुपस्थित होते हैं। अतः ऐल्कोहॉल विद्युत का सुचालक नहीं होता है।

प्रश्न 21. बराबर आण्विक भार वाले हाइड्रोकार्बन की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होता है, क्यों?

उत्तर- बराबर आण्विक भार वाले हाइड्रोकार्बन की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होता है क्योंकि जल के साथ अंतर आण्विक H-बंधन बनाता है। जिससे इसका स्थायित्व बढ़ता है।

प्रश्न 22. पावर एल्कोहल क्या है ?

उत्तर- 80% पेट्रोल तथा 20% ऐथिल

• एल्कोहॉल के मिश्रण को पॉवर एल्कोहल कहते हैं। इसका उपयोग इंजनों में शक्ति उत्पन्न करने में किया जाता है इस मिश्रण को पेट्रोल की जगह उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 23. फीनॉल ऐल्कोहॉल से ज्यादा अम्लीय है। क्यों?

उत्तर- फीनॉल हमेशा ऐल्कोहॉल से ज्यादा अम्लीय होता है क्योंकि ये विलयन में H+ खोने के बाद फीनॉक्साइड आयन का निर्माण करता है जो रेजोनैन्स के कारण स्थिर होता है।

प्रश्न 24 . कारण सहित व्याख्या करें- फिनॉल की प्रकृति अम्लीय होती है।

उत्तर- फौनॉल H+ आयन देने के बाद

● फौनॉक्साइड आयन बनाता है जो अनुनाद स्थिर है और इसलिए फोनॉल प्रकृत्ति में अम्लीय होता है।

प्रश्न 25.निम्रलिखित में अंतर स्पष्ट करने के लिए जाँच जाँचों को लिखें।

(a) एल्डिहाइड और किटोन

(b) ऐथनॉल और एसीटल्डिहाइड

उत्तर- (i) टॉलेन्स परीक्षण ऐल्डिहाइड को जब टॉलेन्स

अभिकर्मक के साथ गर्म किया जाता है तब ऐल्डिहाइड ऑक्सीकृत होकर कार्बोक्सिलिक अम्ल प्रदान करते हैं तथा विलन सिल्वर मुक्त होता है जो परखनाली की दीवारों पर जमा हो जाता है। इसलिए इसे सिल्वर- दर्पण परीक्षण भी कहते है। जबकि कीटोन सिल्वर दर्पण परीक्षण नहीं देता है।

प्रश्न 26. क्या होता है जब एसीटल्डिहाइड को विरंजक चूर्ण के साथ गर्म किया जाता है।

उत्तर- जब ऐसटल्डिहाइड, विरंजक चूर्ण से अभिक्रिया करता है, तो क्लोरोफॉर्म देता है। CH3CHO + Ca(OC)Cl CHCl3 + Ca(HCOO)2

प्रश्न 27. एल्डिहाइड श्रेणी के आरंभिक सदस्यों की जल में ‘विलेयन अधिक है। कारण बतावें?

उत्तर- ऐल्केन जलविरागी होते हैं इसलिए में जल में विलेय नहीं होते हैं, जबकि CHO जलरागी होते हैं इसिलिय जल में विलेय होते हैं तथा जल के साथ H- bond बनाते हैं। आरंभिक एल्डिहाइड में कार्बन की जसंख्या कम होने कारण-CHO समूह जल में घुल जाते हैं जबकि बाद के सदस्यों में कार्बन की सख्या अधिक होने के कारण जल मे अविलेय होते हैं।

प्रश्न 28. फार्मेलिन के दो मुख्य उपयोगों का वर्णन करें।

उत्तर- 40% फॉर्मेल्डिहाइड के जलीय घोल को फार्मेलिन कहते हैं। इसका दो उपयोग निम्न है-

(I). इसे रोगाणु रोधक एवं कीटाणुनाशक में इस्तेमाल किया जा सकता है।

(II). इसका उपयोग सिंथेटिक पॉलिमर जैसे बैक्लाइट और सिंथेटिक डाई के सामान जैसे इंडिगो के निर्माण में किया जाता है।

प्रश्न 29. आप आवश्यक एमीनों अम्ल से क्या समझते हैं?

उत्तर- वैसे एमीनो अम्ल जो हमारे शरीर में नहीं खाने द्वारा सप्लाई होता है, आहार के रूप में उसे आवश्यक एमीनो अम्ल कहते हैं। उदाहरण- लायसिन और जयलीन

प्रश्न 30. अमीनो अम्ल क्या है ?

उत्तर- वैसे कार्बोक्सिलिक अम्ल जिसमें NH2 (अमीनों) क्रियाशील मूलक भी उपस्थित होता है उसे अमीनों अम्ल कहा जाता है। उदाहरण- NH2CH2COOH बहुलक के बाद यह > प्रोटीन में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 31. एंजाइम क्या है?

उत्तर- इंजाइम एक प्रकार का प्रोटीन है जो जैविक जीवों में उत्पादित किया जा सकता है और उत्प्रेरक का काम करता है।

इनवरटेज

उदाहरण- C12H22O11 +H2 O –🡪C6H12O6 + C6H12O6 ग्लूकोज फ्रुक्टोज

प्रश्न 32. डायईथाइल ईथर सोडियम से अभिक्रिया नहीं करता है। क्यों?

उत्तर- ईथर के केस में, उदाहरण के लिए CH3CH2-O-CH2CH3 कोई तत्व या ग्रुप आयनिक प्रकृति का नहीं होता है और न हीं अम्लीय प्रकृति होता है। अतः इन परिस्थिति में ईथर सोडियम के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है।

प्रश्न 33. प्रोटीन का विकृतिकरण क्या है?

उत्तर- जब प्राकृतीक प्रोटीन में भौतिक परिवर्तन करते हैं, जैसे ताप में परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन करते हैं जैसे, pH में परिवर्तन आदि किया जाता है तो हाइड्रोजन आबंधों में अस्तव्यस्तता उत्पन्न हो जाती है।

जिसके कारण गोलिका (ग्लोब्यूल) खुल जाती है तथा हैलिक्स अकुंडलित हो जाती है तथा प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता को खो देता हैं। इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं। उदाहरणः उबालने पर अंडे की सफेदी का स्कंदन, दही का जमना।

प्रश्न 34. DNA के पूर्ण जल अपघटन से प्राप्त यौगिकों के नाम लिखें।

उत्तर- DNA के पूर्ण जल-अपघटन से एक पेन्टोस शुगर, फॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) तथा नाइट्रोजन युक्त विषम चक्रीय यौगिक (जिन्हें क्षारक • कहते हैं) प्राप्त होते हैं। शक्कर इकाई ẞ-D-2-

• डिऑक्सीराइबोज होती है। चार क्षारक यथा ऐडेनीन (A), ग्वानीन (G), साइटोसीन (C) तथा थायमीन (T) होते हैं।

प्रश्न 35. (a) RNA एवं DNA में अंतर बताइए। (b) न्यूक्लिक अम्ल क्या है?

उत्तर- (a) RNA में जैसा कि नाम है। राइबोजन्यूक्लिक अम्ल, राइबोज शुगर इस्तेमाल होता है उनके निर्माण में। लेकिन DNA (डिऑक्सीराइबोज न्यूक्लिक अम्ल) के निर्माण में डिऑक्सीराइबोज शुगर का इस्तेमाल होता है। साधारणतः RNA की पुनरावृत्ति नहीं होती है लेकिन DNA साधारणतः पुनरावृत्ति का गुण प्रदर्शित करता है। DNA के पास दुहरा मानक हेल्किस संरचना होता है लेकिन RNA के पास अकेला मानक हेल्किस सरंचना, . साधारणतः DNA सेल के केंद्र में पाया जाता है लेकिन साधारणतः RNA सेल के कोशिका में।

(b) न्यूक्लिक अम्ल न्युक्लीयोटाइड का बहुलक होता है N. जो कि एक महत्त्वपूर्ण है प्रोटीन के निर्माण में तथा B RNA एवं DNA में परिवर्तित होने में और साधारणतः सभी जीवित सेल में पाया जाता है, न्यूक्लीय प्रोटीन के रूप में। न्यूक्लिक अम्ल के संरचना को दो तरह से अध्ययन किया जाता है-प्राइमरी संरचना और सेकेण्डरी

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