Bihar Board Class 12th Political Science Vvi Subjective Question 2027 – कक्षा 12वीं राजनीतिकशास्त्र महत्वपूर्ण प्रश्न 

Bihar Board Class 12th Political Science Vvi Subjective Question 2027: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित होने वाले इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027 में शामिल होने वाले Arts के विद्यार्थियों के लिए यह लेख बहुत उपयोगी होने वाला है। यदि आप भी Bihar Board Class 12th Political Science Exam 2027 की तैयारी कर रहे हैं। तो यहां दिए गए महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्नों को जरूर पढ़ें।

इस लेख में हम आपको Bihar Board Class 12th Political Science VVI Subjective Question 2027 के अंतर्गत महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उपलब्ध करा रहे हैं इन प्रश्नों का चयन निर्धारित पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण अध्ययन और परीक्षा की तैयारी को ध्यान में रखकर किया गया है।

Bihar Board Class 12th Political Science Vvi Subjective Question 2027

Bihar Board Class 12th Political Science Vvi Subjective Question 2027 – Overview 

विवरण  जानकारी
बोर्ड का नाम बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB)
परीक्षा का नाम इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027
कक्षा 12वीं
विषय Political Science (राजनीतिकशास्त्र)
संकाय Arts
प्रश्न का प्रकार Subjective
अधिकारिक वेबसाइट Biharboardonline.com

1. शून्य काल से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:- संसद के अधिवेशन में प्रश्न-काल के अंत तथा नियमित बहस की शुरूआत के बीच के समय को शून्य-काल कहा जाता है। इस समय लोकसभा अध्यक्ष अथवा राज्य सभा के सभापति की अनुमति से ससिद तात्कालिक सार्वजनिक महत्त्व के मुद्दों पर चर्चा करते हैं। राज्य सभा में दिन की कार्यवाही शून्यकाल से ही प्रारम्भ होती है।

2. आसियान की दो उपलब्धियाँ बताएँ।

उत्तर:- आसियान की उपलब्धियाँ-

(i) आसियान क्षेत्र की कुल अर्थव्यवस्था यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान आदि से काफी छोटी है, फिर भी इसका विकास इसका विकास इन सबसे अधिक तेजी से हो रहा है।

(ii) इसने कंबोडिया के टकराव को समाप्त किया और पूर्वी तिमोर के संकट को सम्भाला।

3. संयुक्त राष्ट्र संघ के अंगों के नाम बताएँ

उत्तर:- संयुक्त राष्ट्र संघ के पाँच प्रमुख अंग हैं- (i) महासभा, (ii) सुरक्षा परिषद्, (iii) आर्थिक एवं सामाजिक परिषद्, (iv) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय एवं (v) सचिवालय

4. सार्क के पक्ष में दो तर्क दें।

उत्तर:- (i) दक्षेश या सार्क देशों के मुक्त व्यापार समझौते (SAFTA) साफ्टा से सदस्य देशों में शाति और सहयोग की भावना में वृद्धि हुई है।

(ii) सदस्य देशों में उदार नीतियों के कारण आर्थिक सुधार हुए हैं।

5. एन०पी०टी० क्या है?

उत्तर:- N.P.T. परमाणु अप्रसार है। इस संधि के तहत जिन देशों ने 1967 से पूर्व परमाणु अस्त्र बना लिये थे या इनका परीक्षण कर बीच किया गया समझौता लिया था उन्हें इन हथियारों को रखने की अनुमति दे दी गई। जो देश 1967 तक ऐसा नहीं कर पाये थे उन्हें ऐसे हथियार को हासिल करने के अधिकार से वंचित किया गया। रूस और अमेरिका को अपने परमाणु हथियारों की संख्या को कम करना होगा।

6. लोकसभा अध्यक्ष की किन्हीं दो शक्तियों का वर्णन करें।

उत्तर:- लोकसभा अध्यक्ष की शक्तियाँ-

(i) विभिन्न विधेयक व प्रस्तावों पर बहस करवाना, मतदान करवाना, परिणाम घोषित करना में निर्णायक मत देने की शक्ति या तथा मतों की समानता की स्थिति।

(ii) सदन के सदस्यों अधिकार। के प्रश्नों को स्वीकार करना, उन्हें नियमित करना व नियम के विरुद्ध घोषित करने की शक्ति या अधिकार।

7. गुट निरपेक्ष आंदोलन की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर:- गुटनिरपेक्ष आंदोलन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

(i) इसने नव स्वतंत्र राष्ट्रों को दोनों महाशक्तियों के गुटों से अलग एक तीसरा विकल्प दिया।

(ii) दोनों महाशक्तियों के बीच विवादों में मध्यस्थता की।

8. क्योटो प्रोटोकोल क्या है ?

उत्तर:- क्योटो प्रोटोकॉल : यह एक अन्तर्राष्ट्रीय समझौता है। इसके अन्तर्गत औद्योगिक देशों के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड, मिथेन क्लोरोफ्लोरोकार्बन (cFC) जैसे हानिकारक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन का कम करने का लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं। इन गैसों का वैश्विक तापवृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

9. संघात्मक व्यवस्था की दो विशेषताओं को लिखें।

उत्तर:- संघात्मक राज्य की चार प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं–

(i) संघात्मक राज्य में दो प्रकार की सरकारें कार्यशील रहती हैं-एक केन्द्र या संघ की तथा दूसरी प्रांत या राज्य की।

(ii) दोनों सरकारों के कार्यक्षेत्र और अधिकार क्षेत्र अलग-अलग होते हैं।

10. समानता का अधिकार क्या है ?

उत्तर:- मौलिक अधिकारों को मूल मानव स्वतंत्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है कि प्रत्येक भारतीय नागरिक को व्यक्तित्व के उचित और सामंजस्यपूर्ण विकास के लिए समानता का अधिकार है। ये अधिकार सार्वभौमिक रूप से सभी नागरिकों पर लागू होते हैं। भले ही उनकी जाति, जन्म स्थान, धर्म जाति या लिंग अलग हों।

11. संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर:- संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जिसकी स्थापना युद्धों को रोकने, आपसी शांति और भाईचारा स्थापित करने तथा जन-कल्याण के कार्य करने के लिए की गई है। आजकल संसार के छोटे-बड़े लगभग 192 देश इसके सदस्य हैं। इस संस्था की विधिवत् स्थापना 24 अक्टूबर,1945 ई० को हुई थी। इस संस्था का मुख्य कार्यालय न्यूयॉर्क, अमेरिका में है।

उद्देश्य:- (i) अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना। (ii) भिन्न-भिन्न राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों को बढ़ावा देना। (iv) आपसी सहयोग द्वारा आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा मानवीय ढंग की अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं को हल करना। (iv) ऊपर दिये गये हितों की पूर्ति के लिए भिन्न-भिन्न राष्ट्रों की कार्यवाही में तालमेल करना ।

12. प्रदूषण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:- पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष को प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण का अर्थ है-हवा, पानी, मिट्टी आदि का अवांछित द्रव्यों से दूषित होना, जिसका सजीवों पर प्रत्यक्ष रूप से विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान द्वारा अन्य अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ते हैं।

13. संक्षेप में प्रदूषण के प्रकारों का वर्णन करें।

उत्तर:- प्रदूषण आज हमारी सबसे बड़ी समस्या है। जिस पर्यावरण में हमारा जीवन चलता है वही प्रदूषित होता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है अंधा-धुंध वैज्ञानिक प्रगति और जनसंख्या विस्फोट । प्रदूषण के अनेक प्रकार हैं-जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण आदि ।

14. ‘विविधता में एकता’ से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:- ‘विविधता में एकता’ होना का अर्थ होता है. अलग-अलग होने पर भी एक होना। हाथ में भिन्न-भिन्न आकार की पाँच अंगुलियाँ होती हैं, पर हथेली एक होती है। वैसे ही भारत अनेक प्रकार के लोग, वेशभूषा, बोली, रीति-रिवाज, त्योहार, खान-पान सब अलग-अलग हैं, फिर भी देश रूप में भारत एक है। और अलग-अलग धर्म, जाति होते हुए भी हम सब भारतीय है। विविधता में एकता होना ही हमारे देश भारत की विशेषता है।

15. 1992 के ‘पृथ्वी सम्मेलन’ के महत्त्व बताएँ ।

उत्तर:- रियो-सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और वानिकी के संबंध में कुछ नियमाचार निर्धारित हुए। इसमें ‘एजेंडा-21’ के रूप में विकास के कुछ तौर-तरीके भी सुझाए गए लेकिन इसके बाद भी आपसी अंतर और कठिनाइयाँ बनी रहीं। सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि आर्थिक वृद्धि से पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। इसे ‘टिकाई विकास’ का तरीका कहा गया लेकिन समस्या यह थी कि ‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा। कुछ आलोचकों का कहना है कि ‘एजेंडा-21’ का झुकाव पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के बजाय आर्थिक वृद्धि की ओर है।

16. भारत की परमाण्विक नीति के मुख्य सिद्धांत क्या हैं?

उत्तर:- भारत की परमाण्विक नीति मुख्यतः आत्मरक्षा यानी देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनायी गयी है। इसका आधार यह है कि हमारा देश पहले परमाण्विक हथियार का आक्रमक रूप में प्रयोग नहीं करेगा पर यदि उकसाया गया तो आत्मरक्षा में अपने परमाणु हथियारों का प्रयोग निश्चित रूप से करेंगे।

17. लोक अदालत क्या है?

उत्तर:- लोक अदालत को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत ‘लोक अदालत’ को वैधानिक दर्जा दिया गया है। जिसके तहत लोक अदालत के अवार्ड (निर्णय) को सिविल न्यायालय का निर्णय माना जाता है, जो कि दोनों पक्षकारों पर बाध्यकारी होता है।

18. बहुदलीय व्यवस्था क्या है ?

उत्तर:- बहुदलीय व्यवस्था एक प्रणाली है जिसमें राजनीतिक वर्णक्रम के आधार पर विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं। और सभी के पास या तो अकेले में या गठबन्धन में सरकारी पद प्राप्त करने की योग्यता हो ।

19. साम्प्रदायिकता क्या है?

उत्तर:- किसी मजहब या जाति विशेष द्वारा निजी स्वाथों के लिए बल छल एवं दबाव को राजनीति करना साम्प्रदायिकता है। किसी खास सम्प्रदाय द्वारा देश की सुरक्षा एवं शांति को प्रभावित करना साम्प्रदायिकता कहलाती है।

20. वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभावों को बताएँ।

उत्तर:- वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव के कारण ही आज विश्व के देशों को विभिन्न देशों के उत्पाद एक ही स्थान पर मिल पा रहे हैं। सेवा क्षेत्र में विकास इसका सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू है। इसी के कारण आधुनिक व्यापार का वैश्विक रूप सामने आया है जिसके कारण विभिन्न उद्योगों को विभिन्न देशों में स्थापित होने व रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

21. बिहार की राजनीति में जाति की भूमिका का वर्णन करें।

उत्तर:- कहा जाता है कि सामुदायिक समाज की संरचना का आधार जाति है क्योंकि एक जाति के लोग ही स्वाभाविक समुदाय का निर्माण करते हैं। इन समुदायों के लोगों के समान हित होते हैं। दूसरे अन्य समुदाय के हितों से उनका हित भिन्न होता है। जाति हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। राजनीति में जाति के अनेक पहलू हो सकते हैं-

(i) निर्वाचन के वक्त पार्टी प्रत्याशी तय करते समय जातीय समीकरण का ध्यान जरूर रखती है। चुनाव क्षेत्र में जिस जाति विशेष की मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक होती है, पार्टियाँ उस जाति के हिसाब से प्रत्याशी तय करती हैं ताकि उन्हें चुनाव जीतने के लिए जरूरी बोट मिल जाए।

सरकार गठन के समय भी जातीय समीकरण को ध्यान में रखा जाता है। (ii) राजनीतिक पार्टियाँ जीत हासिल करने हेतु जातिगत भावना को भड़काने की कोशिश करती हैं। कुछ दल-विशेष की पहचान भी जातिगत भावना के आधार पर हो जाती है।

(iii) निर्वाचन के समय पार्टियाँ वोटरों के बीच साख बनाने हेतु अपना चेहरा स्वच्छ और जाति भावना से ऊपर बनाने की कोशिश करती है।

(iv) दलित और नीची जातियों का भी महत्त्व निर्वाचन के समय बढ़ जाता है। उच्च वर्ग या जाति के उम्मीदवार भी नीची जातियों के सम्मुख नम्र भावना से जाते हैं और उनके मत हासिल करने हेतु अनुनय-विनय करते हैं। इन अवसरों पर नीची जातियों में भी आत्मगौरव जागृत होता है और स्वाभिमान जगता है अर्थात् इन जातियों में राजनीतिक चेतना के सुअवसर प्राप्त होते हैं।

22. भारत के निर्वाचन आयोग के कार्यों का वर्णन करें।

उत्तर:- भारत के निर्वाचन आयोग के कार्य व शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-

(i) यह परिसीमन आयोग अधिनियम के अनुरूप निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करता है।

(iii) यह सभी योग्य मतदाताओं को पंजीकृत करता है।

(ii) यह निर्वाचक नामावलियों को तैयार करता है और समय-समय पर उनमें सुधार करता है।

(iv) यह चुनाव कार्यक्रमों को निर्धारित करता है और उसे अधिसूचित करता है।

(v) यह राजनीतिक दलों को पंजीकृत करता है और उन्हें चुनाव चिन्ह प्रदान करता है।

23. विश्व शांति की स्थापना में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का वर्णन करें।

उत्तर:- संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व में शांति स्थापित करने के लिए अथक प्रयास किए हैं और वह अपने प्रयासों में काफी हद तक सफल भी रहा है क्योंकि शीतयुद्ध को समाप्त करने और तीसरे विश्वयुद्ध को शुरू न होने देन में महत्वपूर्ण भूमिका संयुक्त राष्ट्र संघ की है। विश्व में शांति स्थापित रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जो कार्य किये गये हैं हैं उनमें से मुख्य कार्यों का संक्षिप्त विवेचन निम्नलिखित हैं-

(i) कोरिया की समस्या : 1950 ई० में उत्तरी कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने युद्ध को रोकने के लिए 16 राष्ट्रों की सेनायें उत्तरी कोरिया में प्रतिरोध के लिए भेजी। भारत के सैनिकों ने भी इस कार्यवाही में भाग लिया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सहायता करते हुए दोनों देशों में युद्ध को समाप्त करवाया और देशों देशों के युद्धबन्दियों के आदान-प्रदान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(ii) स्वेज नहर की समस्या : जुलाई, 1956 के बाद में मिस्र ने स्वेज नहर के राष्ट्रीयकरण की घोषणा कर दी। इस राष्ट्रीयकरण से इंगलैंड और फ्रांस को बहुत अधिक हानि होने का भय था अतः उन्होंने स्वेज नहर पर अपना अधिकार जमाने के उद्देश्य से इजराइल द्वारा मिस्र पर आक्रमण करा दिया। इस युद्ध को बन्द कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने सभी प्रयास किये। इन प्रयासों में भारत ने भी पूरा सहयोग दिया और वह युद्ध बन्द हो गया।

(iii) भारत-पाक युद्ध : 1965 ई० में जब पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया तो संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस युद्ध को समाप्त करवाने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। यह युद्ध जनवरी, 1966 ई० में ताशकन्द संधि के साथ समाप्त हुआ।

(iv) खाड़ी युद्ध : 1991 1991 ई० में खाड़ी युद्ध के प्रारम्भ होने पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् ने तुरंत अपनी वैठक बुलाई और वहाँ पर शांति स्थापित करने के लिए प्रस्ताव पास किया। इस प्रकार खाड़ी युद्ध की समाप्ति में संयुक्त राष्ट्र ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

24. भारत में क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका के कारण बताएँ।

उत्तर:- आपात काल के बाद भारतीय राजनीति में कांग्रेस का बर्चस्व घट गया। 1970 से 1990 के दशक में व्यापक राजनीतिक बदलाव हुए हैं। विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों को लेकर आंदोलन हुए, जिसे राजनीतिक दलों को भी समर्थन प्राप्त हुआ। इस आंदोलन से उपजे नेता और राजनीतिक दल अपने क्षेत्रों के हितों की बात को उभारा और राज्य की सत्ता पर अधिकार कर लिया। संघ सरकार बनाने के लिए किसी केन्द्रीय राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिली। अतः सत्ता पाने के लिए राष्ट्रीय दलों ने विभिन्न क्षेत्रीय दलों के साथ साझी नीति के तहत गठबंधन किया। गठबंधन की यह राजनीति अभी तक कायम है। विभिन्न राष्ट्रीय दल क्षेत्रीय दलों से समझौता कर सीटों का बंटवारा करती है और बहुमत मिलने पर सरकार बनाती है। किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलने से गठबंधन होता है, तात्पर्य बहुमत होने पर भी सरकार अल्पमत की होती है। क्षेत्रीय दलों की आकांक्षाएँ पूर्ण नहीं होने पर वह सरकार और गठबंधन से हटकर सरकार को गिरा सकती है। इस प्रकार सरकार के गठन और नीति-निर्धारण में क्षेत्रीय दलों की महती भूमिका होती है, जो बदलते परिवेश में बढ़ती जा रही है।

25. काश्मीर समस्या पर एक निबंध लिखें।

उत्तर:- कश्मीर-समस्या भारत के गले की हड्‌डी बन गयी है जिसकी आड़ में भारत को तबाह करते का घिनौना खेल चल रहा है। सन् 1947 ई० में जब देश का विभाजन धर्म के नाम पर हुआ तो कश्मीर का भारत के साथ विलय हो गया। चूंकि कुछ इलाकों में मुसलमानों की संख्या अधिक थी, इसलिए पाकिस्तानी सेना ने वहाँ के लोगों की आड़ में भारतीय भू-भाग पर आक्रमण कर दिया। इसके पहले कि भारतीय सेना कार्रवाई करती कश्मीर का एक भू-भाग दुश्मनों के हाथ आ गया। बाद में युद्ध-विराम हुआ किन्तु तब तक कुछ भू-भाग आक्रामका के हाथ आ चुका था, अतएव कश्मीर समस्या उठ खड़ी हुई जो आजतक नहीं सुलझी । कश्मीर में कुछ अलगाववादी तत्व हैं जो पूरे कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं। उनका कहना है कि कश्मीर हमारा है। कट्टरपंथी लोग मजहब के नाम पर इसको हवा देते हैं और पाकिस्तानी सेना इनकी सहायता करती है और ये लोग भारत की सीमा में आकर तोड़-फोडू, आगजनी और हत्या करते हैं। इन लोगों के उत्पात के चलते आज कश्मीर के लाखों हिन्दू बेघर होकर, झुग्गी-झोपड़ियों में नारकीय जिन्दगी बसर करते अन्य राज्यों में पलायन, या फिर राहत शिविरों में किसी तरह जिन्दगी जी रहे हैं। वहाँ के शरारती तत्वों ने वहाँ के एक समुदाय विशेष के लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। कश्मीर जो कभी स्वर्ग था, आज नरक से बदतर हो गया है वहाँ कोई नहीं जानता कि आतंकवादी हालत सुधरने की गोली कब उसका कलेजा चाक कर देगी या बम उसके चिथड़े उड़ा के दावे तो बराबर किए जाते हैं लेकिन हकीकत यही है। कश्मीर की समस्या कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहाँ की विधान-सभा के परिसर में बम फूटा है और मंत्रियों एवं विधायकों पर हमले आम नागरिकों और सैनिकों की हत्या तो वहाँ आम बात हो गई है।

26. हरित क्रांति के दो सकारात्मक एवं दो नकारात्मक परिणामों का वर्णन करें।

उत्तर:- हरित क्रांति के दो सकारात्मक परिणाम:-

(i) हरित क्रांति में धनी किसानों और बड़े भू-स्वामियों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ । हरित क्रांति से खेतिहर पैदावार में सामान्य किस्म का इजाफा हुआ (ज्यादातर गेहूँ की पैदावार बढ़ी) और देश में खाद्यान्न की उपलब्धता में बढ़ोत्तरी हुई।

(ii) इससे समाज के विभिन्न वर्गों और देश के अलग-अलग इलाकों के बीच ध्रुवीकरण तेज हुआ। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे इलाके कृषि के लिहाज से समृद्ध हो गए जबकि बाकी इलाके खेती के मामले में पिछड़ते गए।

हरित क्रांति के दो नकारात्मक परिणाम :- (i) इस क्रांति का एक बुरा परिणाम तो यह हुआ कि गरीब किसानों और भू-स्वामियों के बीच का अंतर मुखर हो उठा। इससे देश के विभिन्न हिस्सों में वामपंथी संगठनों के लिए गरीब किसानों को लामबंद करने के लिहाज से अनुकूल स्थिति पैदा हुई।

(ii) हरित क्रांति के कारण कृषि में मझोले दर्जे के किसानों यानी मध्यम श्रेणी के भू-स्वामित्व वाले किसानों का उभार हुआ, जिन्हें बदलावों से फायदा हुआ था और देश के अनेक हिस्सों में ये प्रभावशाली बनकर उठे ।

27. नियोजन का अर्थ बताइए तथा इसके महत्त्व का विवेचन करें।

उत्तर:- किसी भी राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक विकास के लिए युक्तियुक्त नियोजन अत्यावश्यक है. जिसके द्वारा अपूर्व उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। नियोजित विकास सम्पूर्ण समाज एवं सामाजिक व्यवस्था के उत्थान के लाभ को सामने रखता है जिससे नागरिक एक बेहतर एवं अधिक मानवीय जीवन व्यतीत कर सके । नियोजित विकास एक ऐसी भौतिक वास्तविकता एवं मानसिक स्थिति है जिसमें एक समाज सामाजिक, आर्थिक एवं संस्थागत प्रक्रिया के विशिष्ट संयोजन से बेहतर जीवन के साधन प्राप्त करता है। इसके लिए सभी समाजों को निम्नलिखित तीन लक्ष्य होने चाहिए-

(i) भोजन, स्वास्थ्य, आवास एवं सुरक्षा जैसी साधनों की उपलब्धता एवं वितरण को बढ़ाना।

(ii) जीवन स्तर को बढ़ाने के लिए उच्च आय, अधिक रोजगार, बेहतर शिक्षा एवं सांस्कृतिक तथा मानवीय मूल्यों पर पर्याप्त ध्यान देना।

(iii) आर्थिक और सामाजिक विकल्पों की उपलब्धता में वृद्धि करना।

28 . नये सामाजिक आंदोलन से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर:- सामाजिक आंदोलन का अर्थ होता समाज की वर्तमान स्थिति के प्रति असंतोष का प्रदर्शन तथा उसमें बदलाव लाने के लिए संघर्ष एवं विरोध प्रदर्शन का आह्वान । सामाजिक आंदोलन का प्रारंभ तब होता है जब लोग वर्तमान समाज एवं देश की स्थिति से क्षुब्ध होते हैं तथा उसमें व्यापक परिवर्तन लाना चाहते हैं। अनेक बार सामाजिक आंदोलन किसो परिवर्तन का विरोध करने के लिए भी आयोजित किए जाते हैं। सामाजिक आंदोलनों की पृष्ठभूमि में कोई विचारधारा अवश्य होती है। प्रायः ऐसा देखा जाता है कि किसी आंदोलन का प्रारम्भ पहले असंगठित रूप से होता है और धीरे-धीरे उससे जन-समुदाय जुड़ता जाता है। । इस प्रकार वह उत्तरोत्तर संगठित तथा व्यवस्थित होता जाता है। सामाजिक आंदोलन के इस सामूहिक व्यवहार तथा मिलकर उसमें सम्मिलित होने की प्रवृत्ति ने कॉण्ट, दुर्खीम, लीबा, टार्ड आदि को काफी प्रभावित किया तथा उन्होंने इसमें रूचि ली। सामाजिक आंदोलनों में प्रारम्भिक समाजशास्त्रियों की अपेक्षा वर्तमान समाजशास्त्री परिवर्तन के संघर्ष को उत्पन्न करने के लिए सामूहिक व्यवहार के रूप में परिभाषित कर रहे हैं।

29. संकटकालीन स्थिति की घोषणा के क्या प्रभाव हैं ?

उत्तर:- जब राष्ट्र पर कोई अभूतपूर्व संकट आता है, तो राष्ट्रपति द्वारा अपने विशिष्ट अधिकारों का प्रयोग करते हुए संकटकालीन स्थिति की घोषणा की जाती है जिसे आपातकाल की संज्ञा भी दी जाती है। राष्ट्रपति देश की सार्वभौमिकता पर खतरा अथवा अभूतपूर्व आर्थिक संकट देखकर विशेष परिस्थितियों में इस प्रकार का कदम उठाते हैं। इसी प्रकार की एक स्थिति में 1975 में आपातकाल की घोषणा तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अहमद ने की थी। 15 जून, 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी के लोकसभा निर्वाचन को अवैध ानिक करार दिया। प्रधानमंत्री की कुर्सी खतरा में देख, इन्दिरा गाँधी ने राष्ट्रपति को आपातकाल लगाने की सिफारिश की, क्योंकि प्रधानमंत्री के अनुसार संकटकालीन स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। 25 जून, 1975 की मध्य रात्रि में आपातकाल की घोषणा राष्ट्रपति ने की। जिसके साथ ही देश में सेंसरशिप लागू हो गई। नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई। सारी शक्तियाँ केन्द्र सरकार के हाथ में आ गई। संकटकालीन स्थिति आने तथा आपातकाल की घोषणा होने का देश पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। एक असाधारण स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसके निम्नांकित तत्काल प्रभाव परिलक्षित होते है–

(i) नागरिकों के मौलिक अधिकार अवरूद्ध हो जाते हैं।

(ii) देश में सेंसरशिप लागू हो जाती है, प्रेस तथा अन्य संचार माध्यमों पर पाबन्दी, लगा दी जाती है।

(iii) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी जाती है इत्यादि अनेक प्रकार के नियंत्रण एवं पावन्दियों के माध्यम से असाधारण स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

30. राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों में क्या अंतर है ?

उत्तर:- राष्ट्रीय दल : राष्ट्रीय दल उन्हें कहा जाता है, जिनका प्रभाव सम्पूर्ण राष्ट्र तक विस्तृत रहता है। इनके सदस्यों की संख्या देश के सभी राज्यों में होती है। राष्ट्रीय दल की स्थापना के समय उसकी नियमावली बनानी होती है। पार्टी का घोषणा-पत्र तैयार किया जाता है. जिसमें उसके उद्देश्य एवं लक्ष्य का विवरण रहता है। उसके बाद उसका निबंधन कराना होता है। चुनाव आयोग से अपने दल के झंडा पर अंकित चिन्ह जो पार्टी की कार्यकारिणी तय करती है. स्वीकृत कराना पड़ता है। राष्ट्रीय दल देश के सभी राज्यों की विधान सभाओं तथा संसद (लोकसभा एवं राज्यसभा के चुनाव में भाग ले सकता है। राष्ट्रीय दल काँग्रेस, भाजपा, सी०पी०आई०, सी०पी०एम० राष्ट्रीय दल हैं।

क्षेत्रीय दल : क्षेत्रीय दलों को राज्यस्तरीय दल भी कहा जा सकता है। राज्यस्तरीय दल का दर्जा प्राप्त करने के लिए संबंधित दल को लोकसभा अथवा विधान सभा में डाले गए कुल मतों के कम-से-कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करने के साथ ही राज्य विधान सभा में कम-से-कम दो सीटे जीतना आवश्यक है, अथवा विधान सभा की कुल सदस्य संख्या की कम-से-कम तीन प्रतिशत सीटें अथवा तीन सीटें (इनमें जो भी अधिक हो) जीतना आवश्यक होगा। 14 मई, 2005 को संशोधित नियमों के अनुसार दो वैकल्पिक शर्तें और जोड़ दी गई हैं

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FAQ’s – Bihar Board Class 12th Political Science Vvi Subjective Question 2027

Q1. Bihar Board Class 12th Political Science Exam 2027 कब होगा? 

बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027 का आयोजन फरवरी 2027 में होने की जानकारी उपलब्ध है सटीक विषय पर परीक्षा तिथि के लिए अधिकारी के रूटीन देखें।

Q2. Political Science मैं अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें? 

Political Science में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए निर्धारित पाठ्य पुस्तक का नियमित अध्ययन करें महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र हल करें।

Q3. क्या VVI Subjective Question 2027 से परीक्षा में प्रश्न आएंगे? 

यहां दिए गए प्रश्न महत्वपूर्ण अध्याय का आधार पर अभ्यास के लिए तैयार किए गए हैं इनमें से कुछ प्रश्न परीक्षा में पूछे जा सकते हैं लेकिन किसी प्रश्न के आने की गारंटी नहीं है।

Q4. Bihar Board 12th Political Science का मॉडल पेपर कहां मिलेगा? 

विद्यार्थी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर मॉडल पेपर देख सकते हैं।

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